Monday, July 02, 2007

लगे रहो चमन भाई

चमन भाई को पता चला की उसके एकाउंटेंट ने उसे ५० करोड़ का चुना लगाया है.

एकाउंटेंट गूंगा और बहरा था. उसे नौकरी पर इसलिये लगाया था की बहरा होने के कारण कभी कोई राज़ की बात सुन नहीं सकेगा, और गूंगा होने के कारण कभी कोर्ट में उसके खिलाफ गवाही नहीं दे सकेगा.

चमन भाई को गूंगे-बहारो के इशारो की समझ नहीं थी इसलिये पूछताछ के लिए अपने दाहिने हाथ "सटकेला" को ले गया जिसे इशारो की समझ थी.

चमन भाई ने एकाउंटेंट से पूछा "बता तुने जो मेरे ५० करोड़ उडाये है वो कहाँ छुपा रखे है?"

सटकेला ने इशारो में एकाउंटेंट से पुछा उसने पैसे कहाँ छुपाये.

एकाउंटेंट ने इशारे में कहाँ : "मैं कुछ नहीं जानता तुम किं पैसो की बात कर रहे हो"

सटकेला ने चमन भाई से कहा: "भाई बोल रहा वो कुछ नहीं जानता हम किं पैसो की बात कर रहे है."

चमन भाई को गुस्सा आ गया और पिस्तौल एकाउंटेंट की कनपट्टी पर रखकर बोला "अब फिर पूछ!"

सटकेला ने इशारों में एकाउंटेंट को कहा: "तुने अगर नहीं बताया और भाई ने घोडा दबा दिया तो समझ ले तेरी वाट लग जायेगी!"

एकाउंटेंट ने डरकर इशारे किये: "अच्छा! में बताता हूँ! मैंने पैसे मेरे चचेरे भाई संतु के घर के पिछवाड़े में गाड़ दिए थे!"

चमन भाई ने पूछा: "क्या बोलता है सटकेला?"

सटकेला ने जवाब दिया: "भाई... बोलता है... की आपमें हिम्मत नहीं की उसे गोली मार सके!!"

रोबोट

एक दिन राजू के पापा एक रोबोट ले कर आये.

वह रोबोट झूठ पकड़ सकता था और झूठ बोलने वाले को गाल पर खीँच कर चांटा मार देता था.

आज राजू स्कूल से घर देर से आया था... पापा ने पूछा "घर लौटने में देर क्यो हो गयी?"

"आज हमारी एक्स्ट्रा क्लासेस थी" राजू ने जवाब दिया...

रोबोट अचानक अपनी जगह से उछला और जमकर राजू के गाल पर चांटा मार दिया.

पापा हंसकर बोले, "ये रोबोट हर झूठ को पकड़ सकता है और झूठ बोलने वाले को चांटा भी मारता है. अब सच क्या है यह बताओ... कहाँ गए थे?"

"में फिल्म देखने गया था" राजू बोला

"कौन सी फिल्म?" पापा ने कड़ककर पूछा

"हनुमान"
चटाक... अभी राजू की बात पूरी भी नहीं हुई थी की उसके गाल पर रोबोट ने एक जोर का चांटा मारा.

"कौन सी फिल्म?" पापा ने फिर पूछा

"कातिल जवानी."

पापा ग़ुस्से में बोले "शर्म आनी चाहिए तुम्हे. जब में तुम्हारे जितना था तब ऐसी हरकत नहीं किया करता था."

चटाक... रोबोट ने एक चांटा मारा... इस बार पापा के गाल पर.

यह सुनते ही मम्मी किचन में से आते हुए बोली "आख़िर तुम्हारा बेटा है ना... झूठ तो बोलेगा ही"

अब मम्मी की बारी थी... चटाक...

Thursday, June 28, 2007

बाथरूम सिंगर

लड़का: चलो किसी वीरान जगह चलते हैं!
लडकी: तुम ऐसी-वैसी हरकत तो नही करोगे?
लड़का: बिल्कुल नही!
लडकी: तो फिर रहने दो...


रावण को अदालत में गीता पर हाथ रखना को कहा गया. उसने मना कर दिया
बोला: सीता पर हाथ रख कर इतनी मुसीबत आयी! अब गीता... नहीं...


अगर आप बस पे चढे...
या फिर बस आप पे चढे...
दोनो मर्तबा टिकिट आपका ही काटता है


एक औरत दुसरी से: जब तेरा तलाक हुवा था तब तो एक ही बच्चा था
और अब ३ कैसे?
दुसरी बोली: वो कभी कभी माफ़ी मँगाने आ जाते थे...


तुम्हारी गर्ल फ्रेंड का एसएमएस मिला है,
कहती है कोई पत्थर से ना मारे मेरे दीवाना को,
इक्कीसवी सदी है बम से उड़ा दो साले को.


एक महल बनाने के लिए हज़ारो मजदूर लगते है...
लाखो सैनिक देश की रक्षा के लिए,
पर सिर्फ एक औरत घर को खुशहाल बनाने के लिए!
आईये धन्यवाद दे... कामवाली को


लड़का: तुम गाना बहुत अच्छा गाती हो.
लडकी: नहीं, में तो सिर्फ बाथरूम सिंगर हूँ.
लड़का: तो बुलाओ ना कभी, महफिल जमाते हैं.


बॉस ग़ुस्से में: तुमने कभी उल्लू देखा है?
कर्मचारी (सर झुकाते हुए): नहीं सर .
बॉस: नीचे क्या देख रहे हो ? मेरी तरफ देखो.

Wednesday, June 27, 2007

मीटर बंद कर

वो बोले "महफिल में कहीँ हमारे जूते खो गए अब हम घर कैसे जायेगे",
हमने कहा "आप शायरी शुरू कर दीजिए इतने आयेगे की फिर गिन नही पायेंगे"


एक नया जोड़ा शादी के बाद आशीर्वाद लेने के लिए नेता के पास गया.
नेता बोला "हम आशीर्वाद नही देते... सिर्फ उदघाटन ही करते हैं"

टैक्सी ड्राइवर मारवाड़ी पस्सेंजर से : "सर गाडी के ब्रेक फेल हो गए है अब क्या करु.?"
मारवाड़ी : "हरामखोर, पहले मीटर बंद कर..."

५ साल बाद

शादी के बाद...

अभी शादी का पहला ही साल था,
ख़ुशी के मारे मेरा बुरा हाल था,
खुशियाँ कुछ यूं उमड़ रहीं थी,
की संभाले नही संभल रही थी..

सुबह सुबह मैडम का चाय ले कर आना
थोडा शरमाते हुये हमें नींद से जगाना,
वो प्यार भरा हाथ हमारे बालों में फिरना,
मुस्कुराते हुये कहना की...

डार्लिंग चाय तो पी लो,
जल्दी से रेडी हो जाओ,
आप को ऑफिस भी है जाना...

घरवाली भगवान का रुप ले कर आयी थी,
दिल और दिमाग पर पूरी तरह छाई थी,
सांस भी लेते थे तो नाम उसी का होता था,
इक पल भी दूर जीना दुश्वार होता था...

५ साल बाद........

सुबह सुबह मैडम का चाय ले कर आना,
टेबल पर रख कर जोर से चिल्लाना,
आज ऑफिस जाओ तो मुन्ना को
स्कूल छोड़ते हुए जाना...

सुनो एक बार फिर वोही आवाज आयी,
क्या बात है अभी तक छोड़ी नही चारपाई,
अगर मुन्ना लेट हो गया तो देख लेना,
मुन्ना की टीचर्स को फिर खुद ही संभाल लेना...

ना जाने घरवाली कैसा रुप ले कर आयी थी,
दिल और दिमाग पर काली घटा छाई थी,
सांस भी लेते हैं तो उन्ही का ख़याल होता है,
अब हर समय जेहन में एक ही सवाल होता है...

क्या कभी वो दिन लौट के आएंगे,
हम एक बार फिर कुंवारे हो जायेंगे.... ...!

Sunday, May 20, 2007

आत्महत्या

एक आदमी लायब्रेरियन के पास पंहुचा : "भाई साहब आप मुझे आत्महत्या पर कोई किताब दे सकते है ।
लायब्रेरियन : नहीं दे सकता । आप लौटायेंगे नहीं !

Friday, May 18, 2007

कटिंग

कटिंग बोले तो ... भारत में दो चीजों को कहते है । अगर आप किसी रेस्टोरेंट में जाते है तो एक ग्लास चाय का जो ऊपर से आधा इंच खाली हो । दुसरा अगर किसी नाई की दुकान में जाते है तो बाल/केश कटाने को । यहाँ हम दुसरे कटिंग की बात कर रहे है ।

आज हमे हमारे मेल पर एक फोरवर्ड मिला । अब ये मत पूछियेगा की फोरवर्ड क्या है । इन्टरनेट पर अगर कुछ सबसे ज्यादा चलता है तो वो है फोरवर्ड । आपको कोई मेल मिला, पसंद आया, भेज दीजिए उसे दस अन्य लोगो को । नहीं पसंद आया तो भी भेज दीजिए, अपना टाईम वेस्ट हुआ तो दूसरो को क्यो बख्शे । तो हमे फोरवर्ड मिला, पसंद आया, तो हमने सोचा इसका हिन्दीकरण कर आप लोगो को फोरवर्ड कर दे।

तो कहानी यूं है ...

एक बुढ़ा नाई था । एक माली उसके पास कटिंग कराने गया । कटिंग के बाद जब पैसे देने चाहे तो नाई ने जवाब दिया :
माफ़ कीजिये में आपसे पैसे नही ले सकता । में समाज सेवा कर रहा हूँ । माली ख़ुशी ख़ुशी दुकान से चला गया ।

अगले दिन जब नाई दुकान पर पहुचा तो दरवाजे पर उसने पाया एक दर्जन खुशबूदार लाल गुलाब और साथ में एक "धन्यवाद" कार्ड ।

एक हलवाई उसके पास कटिंग कराने पंहुचा । उसने भी जब कटिंग के बाद जब पैसे देने चाहे तो नाई ने पैसे लेने से इनकार कर दिया । हलवाई भी ख़ुशी ख़ुशी दुकान से चला गया ।

अगले दिन जब नाई दुकान पर पहुचा तो दरवाजे पर उसने पाया एक दर्जन रस मलाई और साथ में एक "धन्यवाद" कार्ड ।

एक सॉफ्टवेयर इंजिनियर ने कटिंग कराया पैसे देने पर नाई ने पैसे लेने से इनकार कर दिया यह कह कर की वो समाज सेवा कर रहा है ।

अगले दिन जब नाई दुकान पर पहुचा तो जानते है उसने दरवाजे पर क्या पाया ...
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एक दर्जन सोफ्टवेयर इंजिनियर करते हुए फ्री कटिंग का इंतज़ार । सबके हाथ में फोरवर्ड किये गए मेल के प्रिंट आऊट ।
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कहानी खत्म ... अब ये मत पूछियेगा उस मेल में क्या लिखा था ... और उस नाई का पता तो बिल्कुल भी नहीं ...

बचाओ बचाओ

डूबते हुए आदमी ने
पुल पर चलते हुए आदमी को
आवाज़ लगायी "बचाओ बचाओ"
पुल पर चलते आदमी ने नीचे
रस्सी फेंकी और कहा आओ...

नदी में डूबता हुआ आदमी
रस्सी नही पकड़ पा रहा था
रह रह कर चिल्ला रहा था
मैं मरना नही चाहता
जिन्दगी बड़ी महंगी है
कल ही तो मेरी एक MNC में नौकरी लगी है....

इतना सुनते ही पुल पर चलते
आदमी ने अपनी रस्सी खींच ली
और भागते भागते वो MNC गया
उसने वहाँ के HR को बताया की
अभी अभी एक आदमी डूबकर मर गया है
और इस तरह आपकी कंपनी में
एक जगह खाली कर गया है...

में बेरोजगार हूँ मुझे ले लो...
HR बोली दोस्त तुमने देर कर दी,
अब से कुछ देर पहले
हमने उस आदमी को लगाया है
जो उससे धक्का दे कर
तुमसे पहले यहाँ आया है !!!

Thursday, May 03, 2007

उफ़ ये फैशन

कान्तिभाई (सड़क किनारे खडे एक राहगीर से) :
नीली जीन्स पहने उस छोटे बाल वाले व्यक्ति को देखो तो । लड़का है या लडकी?

राहगीर : वो लडकी है और मेरी बेटी है

कान्तिभाई : माफ़ कीजिये मुझे पता नही था की आप उसके पिता है।

राहगीर : पिता ? में उसकी माँ हूँ !

Monday, March 19, 2007

ऑटो-मे-टकली

एक बार संता गंगुबाई के घर जाता है और दरवाज़ा knock करता है.
गंगुबाई: कौन ?
संता: मैं !
गंगुबाई: मैं कौन?
संता: ओये, तू गंगुबाई..

बंता: यह चाक़ू क्यों उबाल रहे हो?
संता: Suicide करने के लिए
बंता: तो फिर उबलने कुई क्या ज़रूरत है?
संता: कहीं infection ना हो जाये ।

संता अपनी खूबसूरत बीबी के साथ कार में बैठा। ड्राइवर ने शीशा सेट किया. संता ग़ुस्से में बोला, मेरी बीबी को देखता है, पीछे बैठ , कार में चलाऊंगा!

बंता: परेशान लग रहे हो? क्या हुआ?
संता: में बाप बनने वाला हूँ
बंता:पर यह तो अच्छा है
संता: इसमे अच्छा क्या है? मेरी बीबी को अभी तक नही पता है!

बंता: यह AUTOMATICALLY क्या होता है?
संता: ओये तेनु एह वी नहीं पता, जब ऑटो में कोई गंजी लडकी जा रही हो तो उसे कहते हैं ऑटो-मे-टकली

हिंदी बोलना हमारी Duty है

Ladies And Gentlemen,
India हमारी Country है,
और हम है इंडिया के Citizen,
इसलिये हिंदी बोलना हमारी Duty है,
पर बेचारी हिंदी की किस्मत ही फूटी है,
आज कि Young Generation Whenever माउथ खोलती है,
Only And Only English ही बोलती है,
Person कि Ability को English से तौलती है,
तब हमारा सिर Shame से झुक जाता है,
And Heart Deep वेदना से भर जाता है,
ये सब Very Wrong है,
In Reality देशद्रोह है, ढोंग है,
हमे अपनी Daily Life में हिंदी Language को लाना है,
Worldwide फैलाना है,
Then And Only Then,
हमारी भारत माता के,
Dreams होंगे सच,
Thank You All Very Very Much.

(श्री खुशवंत सिंह जी कि रचना, जैसा कि मैं अपनी स्मृति से निकाल सका। blogger के नए द्विभाषिक Interface का इससे अच्छा उपयोग किसी और रचना में कहां)

Saturday, March 17, 2007

दीदी

संता के घर लडकी ने जनम लिया
बंता: जब लडकी बड़ी होगी तो लड़के इसे छेड़ेंगे
संता: मैंने इसका इन्तजाम कर लिए है
बंता: क्या किया
संता: लडकी का नाम दीदी रख दिया है


संता : यार, मैं अपनी गर्ल फ्रेंड नु गिफ्ट देना है की देवाँ ??
बंता : गोल्ड रिंग दे दे
संता : नै यार, कोई बड़ी चीज़ दस
बंता : MRF दा टायर दे दे



संता स्कूल आता है 1 काला और 1 सफ़ेद जूता पहनकर ।
टीचर - घर जाओ और जूते बदल कर आओ
संता - टीचर कोई फ़ायदा नही वहा भी एक काला और एक सफ़ेद जूता ही रखा है