Monday, March 19, 2007

ऑटो-मे-टकली

एक बार संता गंगुबाई के घर जाता है और दरवाज़ा knock करता है.
गंगुबाई: कौन ?
संता: मैं !
गंगुबाई: मैं कौन?
संता: ओये, तू गंगुबाई..

बंता: यह चाक़ू क्यों उबाल रहे हो?
संता: Suicide करने के लिए
बंता: तो फिर उबलने कुई क्या ज़रूरत है?
संता: कहीं infection ना हो जाये ।

संता अपनी खूबसूरत बीबी के साथ कार में बैठा। ड्राइवर ने शीशा सेट किया. संता ग़ुस्से में बोला, मेरी बीबी को देखता है, पीछे बैठ , कार में चलाऊंगा!

बंता: परेशान लग रहे हो? क्या हुआ?
संता: में बाप बनने वाला हूँ
बंता:पर यह तो अच्छा है
संता: इसमे अच्छा क्या है? मेरी बीबी को अभी तक नही पता है!

बंता: यह AUTOMATICALLY क्या होता है?
संता: ओये तेनु एह वी नहीं पता, जब ऑटो में कोई गंजी लडकी जा रही हो तो उसे कहते हैं ऑटो-मे-टकली

हिंदी बोलना हमारी Duty है

Ladies And Gentlemen,
India हमारी Country है,
और हम है इंडिया के Citizen,
इसलिये हिंदी बोलना हमारी Duty है,
पर बेचारी हिंदी की किस्मत ही फूटी है,
आज कि Young Generation Whenever माउथ खोलती है,
Only And Only English ही बोलती है,
Person कि Ability को English से तौलती है,
तब हमारा सिर Shame से झुक जाता है,
And Heart Deep वेदना से भर जाता है,
ये सब Very Wrong है,
In Reality देशद्रोह है, ढोंग है,
हमे अपनी Daily Life में हिंदी Language को लाना है,
Worldwide फैलाना है,
Then And Only Then,
हमारी भारत माता के,
Dreams होंगे सच,
Thank You All Very Very Much.

(श्री खुशवंत सिंह जी कि रचना, जैसा कि मैं अपनी स्मृति से निकाल सका। blogger के नए द्विभाषिक Interface का इससे अच्छा उपयोग किसी और रचना में कहां)

Saturday, March 17, 2007

दीदी

संता के घर लडकी ने जनम लिया
बंता: जब लडकी बड़ी होगी तो लड़के इसे छेड़ेंगे
संता: मैंने इसका इन्तजाम कर लिए है
बंता: क्या किया
संता: लडकी का नाम दीदी रख दिया है


संता : यार, मैं अपनी गर्ल फ्रेंड नु गिफ्ट देना है की देवाँ ??
बंता : गोल्ड रिंग दे दे
संता : नै यार, कोई बड़ी चीज़ दस
बंता : MRF दा टायर दे दे



संता स्कूल आता है 1 काला और 1 सफ़ेद जूता पहनकर ।
टीचर - घर जाओ और जूते बदल कर आओ
संता - टीचर कोई फ़ायदा नही वहा भी एक काला और एक सफ़ेद जूता ही रखा है