Friday, May 18, 2007

कटिंग

कटिंग बोले तो ... भारत में दो चीजों को कहते है । अगर आप किसी रेस्टोरेंट में जाते है तो एक ग्लास चाय का जो ऊपर से आधा इंच खाली हो । दुसरा अगर किसी नाई की दुकान में जाते है तो बाल/केश कटाने को । यहाँ हम दुसरे कटिंग की बात कर रहे है ।

आज हमे हमारे मेल पर एक फोरवर्ड मिला । अब ये मत पूछियेगा की फोरवर्ड क्या है । इन्टरनेट पर अगर कुछ सबसे ज्यादा चलता है तो वो है फोरवर्ड । आपको कोई मेल मिला, पसंद आया, भेज दीजिए उसे दस अन्य लोगो को । नहीं पसंद आया तो भी भेज दीजिए, अपना टाईम वेस्ट हुआ तो दूसरो को क्यो बख्शे । तो हमे फोरवर्ड मिला, पसंद आया, तो हमने सोचा इसका हिन्दीकरण कर आप लोगो को फोरवर्ड कर दे।

तो कहानी यूं है ...

एक बुढ़ा नाई था । एक माली उसके पास कटिंग कराने गया । कटिंग के बाद जब पैसे देने चाहे तो नाई ने जवाब दिया :
माफ़ कीजिये में आपसे पैसे नही ले सकता । में समाज सेवा कर रहा हूँ । माली ख़ुशी ख़ुशी दुकान से चला गया ।

अगले दिन जब नाई दुकान पर पहुचा तो दरवाजे पर उसने पाया एक दर्जन खुशबूदार लाल गुलाब और साथ में एक "धन्यवाद" कार्ड ।

एक हलवाई उसके पास कटिंग कराने पंहुचा । उसने भी जब कटिंग के बाद जब पैसे देने चाहे तो नाई ने पैसे लेने से इनकार कर दिया । हलवाई भी ख़ुशी ख़ुशी दुकान से चला गया ।

अगले दिन जब नाई दुकान पर पहुचा तो दरवाजे पर उसने पाया एक दर्जन रस मलाई और साथ में एक "धन्यवाद" कार्ड ।

एक सॉफ्टवेयर इंजिनियर ने कटिंग कराया पैसे देने पर नाई ने पैसे लेने से इनकार कर दिया यह कह कर की वो समाज सेवा कर रहा है ।

अगले दिन जब नाई दुकान पर पहुचा तो जानते है उसने दरवाजे पर क्या पाया ...
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एक दर्जन सोफ्टवेयर इंजिनियर करते हुए फ्री कटिंग का इंतज़ार । सबके हाथ में फोरवर्ड किये गए मेल के प्रिंट आऊट ।
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कहानी खत्म ... अब ये मत पूछियेगा उस मेल में क्या लिखा था ... और उस नाई का पता तो बिल्कुल भी नहीं ...